सनातन धर्म में, सावन का महीना बड़ा ही पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में भारत के कुछ हिस्सों में कावड़ यात्रा करके महादेव को जलाभिषेक करते हैं। यह प्रचलन काफी प्राचीन है। इस यात्रा में कांवर में जल भरकर हरिद्वार और देवघर जैसे तीर्थ स्थान तक पैदल यात्रा करके शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है।

कांवड़ यात्रा एक आध्यात्मिक साधना की यात्रा है। परंतु अब ऐसा देखने को मिल रहा है। की अब यह आध्यात्मिक यात्रा, धीरे-धीरे मनोरंजन यात्रा में बदलती जा रही है। 


आईए जानते हैं वर्तमान कांवड़ यात्रा मैं क्या बदलाव देखा जा रहा है। 

Alt="Kanvar Yatra ya Manoranjan Yatra:-कावड़ यात्रा अब मनोरंजन की यात्रा बनती जा रही है"
धार्मिक यात्रा पर और अधार्मिक डांस 


1. D J के साथ यात्रा करना:--

बहुत से कावड़ यात्री एक समूह बनाकर बड़े से साउंड सिस्टम तथा कोई डी जे के साथ यात्रा करते हैं। यह यात्रा धार्मिक यात्रा कम , म्यूजिक पार्टी यात्रा ज्यादा लगती है। इन म्यूजिक सिस्टम में धार्मिक गाना साथ कहीं-कहीं पर गन्दी और फूहड़ गाने भी बजा देते हैं। 


2. दिखावा की यात्रा करना:-

बहुत से कावड़ यात्री ऐसे भी हैं,जो कांवड़ यात्रा में महादेव की भक्ति का भाव कम और सोशल मीडिया में भक्ति का दिखावा ज्यादा करते हैं। हर जगह केवल सोशल मीडिया रिल्स बनाते रहते हैं। ऐसा लगता है जैसे मनोरंजन करने और रिल्स बनाने के लिए ही यात्रा कर रहा हो।


3. चुपके से मांस मदिरा का सेवन:-

ऐसा कई घटनाएं सामने आई हैं। जहां कांवड़िया अपने यात्रा के दौरान चुपके से मांस मदिरा का भी सेवन करते पाए गए हैं। 


4. सच्चे धार्मिक कावड़ यात्रियों को परेशानी होना:-

जो लोग महादेव के भक्ति भाव से तथा कांवड़ यात्रा का सही नियम को पालन करते हुए यात्रा करते हैं। उन कांवड़ यात्रियों को, इन झूठे और मनोरंजन करने वाले कावड़ यात्रियों से काफी परेशानी होती है। 


कांवड़ यात्रा के बारे में सनातन धर्म क्या कहता है:-

आईए जानते हैं। 

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कांवड़ यात्रा के बारे में क्या कहते हैं धर्मशास्त्र 


सनातन धर्म में जितने भी धर्मशास्त्र हैं ,उनके अनुसार कांवड़ यात्रा को महादेव की भक्ति तथा तपस्या की यात्रा बताया गया है इसके कुछ नियम भी बताए गए हैं। जैसे यात्रा के दौरान पालन करना अनिवार्य है। यात्रा के कुछ मुख्य बातें जैसे क्रोध नही करना, विनम्रता बनाए रखना तथा दूसरे को कष्ट नहीं देना, इन सभी बातों को पालन करना अनिवार्य है। 


निष्कर्ष: -

कांवड़ यात्रा को मनोरंजन की यात्रा तथा झूठे भक्ति के दिखावे की यात्रा नहीं बनाना चाहिए। यह एक धार्मिक यात्रा है। इस यात्रा से भक्ति को शक्ति मिलती है।तथा जीवन में अनुशासन आता है। यह यात्रा एक तपस्या है। स्वयं को नियंत्रित करने का तथा शिव प्रति समर्पित होने का। सिर्फ शिव भक्ति ही उद्देश्य होना चाहिए। 
हर हर महादेव -------


By:--deobrat bhaskar sharma